🚀 ISRO Tightens Retirement Rules After Scientists Exit During Key Space Missions
हाल ही में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (आईएसआरओ) से 100 से अधिक वैज्ञानिकों ने इस्तीफा दे दिया है या स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली है, जिसके चलते अंतरिक्ष विभाग (डीओएस) ने सेवानिवृत्ति नियमों को सख्त कर दिया है। विशेष रूप से गगनयान जैसे महत्वपूर्ण मिशनों से वैज्ञानिकों के इस अचानक इस्तीफे का मुख्य कारण भारत के बढ़ते निजी अंतरिक्ष क्षेत्र में बेहतर वेतन और अवसर बताए जा रहे हैं।
🛰 Department of Space Introduces Stricter Approval Process
अंतरिक्ष विभाग ने 14 जुलाई, 2026 को एक ज्ञापन जारी कर बेंगलुरु स्थित यूआर राव उपग्रह केंद्र (यूआरएससी) और तिरुवनंतपुरम स्थित विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (वीएसएससी) जैसे प्रमुख केंद्रों को निर्देश दिया कि वे ग्रुप ए के वैज्ञानिक और तकनीकी कर्मियों के इस्तीफे या स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के अनुरोधों को नियमित रूप से स्वीकार न करें। प्रमुख परियोजनाओं से जुड़े कर्मचारियों के सभी निवर्तमान अनुरोध अब केंद्रीय अंतरिक्ष विभाग की स्वीकृति के अधीन होंगे।
🌍 Key Space Missions Affected
हाल की घटनाओं के अनुसार गगनयान (मानव अंतरिक्ष उड़ान) मिशन, स्पैडेक्स (अंतरिक्ष डॉकिंग प्रयोग), चंद्रयान-3 और एलवीएम-3 परियोजनाओं से जुड़े उच्च-स्तरीय कर्मियों ने अपने इस्तीफे सौंप दिए हैं। इन परियोजनाओं को भारत के भविष्य के अंतरिक्ष कार्यक्रमों के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है।
📋 Retirement Policy Reversed
नए निर्देशों के तहत वर्ष 2020 में लागू उस प्रशासनिक व्यवस्था को प्रभावी रूप से बदल दिया गया है, जिसमें व्यक्तिगत आईएसआरओ केंद्र निदेशकों को नियमित इस्तीफे और स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) अनुरोधों को मंजूरी देने का अधिकार था। अब ऐसे मामलों में अंतिम निर्णय अंतरिक्ष विभाग स्तर पर लिया जाएगा।
🗣 Official Response
इसरो के अध्यक्ष वी. नारायणन और केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कर्मचारियों के जाने की पुष्टि करते हुए कहा है कि उनकी जगह नई टीमें तैयार की जा रही हैं। उनके अनुसार भारत के तेजी से विकसित हो रहे अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र में वैज्ञानिकों का विभिन्न संगठनों के बीच आना-जाना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है।
✍ Al Hind Times View
भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र तेजी से विस्तार कर रहा है, जहां सरकारी और निजी दोनों संस्थान नई संभावनाएं लेकर सामने आ रहे हैं। ऐसे समय में अनुभवी वैज्ञानिकों को महत्वपूर्ण राष्ट्रीय परियोजनाओं से जोड़े रखना गगनयान, चंद्रयान और भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों की सफलता के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

